रात के ठीक 2 बजकर 17 मिनट पर पूरे गांव में जैसे किसी ने सन्नाटा उंडेल दिया हो, कुत्तों के भौंकने की आवाज अचानक एक साथ बंद हो गई। हवा चल रही थी, लेकिन पेड़ों की पत्तियां हिल नहीं रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे समय कुछ सेकंड के लिए रुक गया हो। और तभी, गांव के बीचों-बीच पड़े उस पुराने सूखे कुएं की तरफ से एक धीमी, लेकिन साफ आवाज आने लगी—छप… छप… छप… जैसे कोई गहरे पानी में बाल्टी डालकर भर रहा हो। जबकि उस कुएं में पिछले बीस सालों से पानी की एक बूंद भी नहीं थी। उस रात जिसने भी वह आवाज सुनी, उसने अपने कानों