जब वो छोटे थे…
मेरी क्लास में बैठते थे…
आँखों में सपने लेकर…
मेरी तरफ देखा करते थे…
कोई डॉक्टर बनना चाहता था…
कोई इंजीनियर…
कोई अफसर…
और मैं…
उन्हें रास्ता दिखाता था…
उन्हें समझाता था…
उन्हें गिरने से बचाता था…
कभी डाँटता भी था…
लेकिन…
हर डाँट के पीछे…
उनके लिए एक दुआ होती थी…
वो आगे बढ़ते गए…
और मैं…
पीछे रह गया…