ठेकेदार ने कहा—
“अगर ज्यादा पैसे चाहिए तो दोगुना काम करना पड़ेगा।”
रामू ने बिना सोचे कहा—
“मैं करूँगा।”
उस दिन धूप बहुत तेज थी।
कई मजदूर बीच-बीच में आराम करने लगे।
लेकिन रामू लगातार काम करता रहा।
शाम तक उसके हाथ कांपने लगे थे।
लेकिन उसने काम पूरा किया।
ठेकेदार ने उसे कुछ अतिरिक्त पैसे दिए।
रामू उन पैसों को लेकर जल्दी-जल्दी घर पहुँचा।
उसने पैसे अरुण के हाथ में रखे और कहा—
“जा बेटा… कल फीस भर देना।”
अरुण की आँखों में आँसू आ गए।
उसने अपने पिता को गले लगा लिया।