, और फिर अपने पति के लिए खाना बनाती।
राम कभी-कभी बिना वजह नाराज़ हो जाता, ऊँची आवाज़ में बात करता… लेकिन सिया कभी जवाब नहीं देती थी। वो बस चुपचाप सब सह लेती, और मन ही मन भगवान से यही प्रार्थना करती कि उसका पति हमेशा खुश रहे।
एक दिन राम बहुत बीमार पड़ गया। हालत इतनी खराब हो गई कि डॉक्टर ने भी उम्मीद छोड़ दी।
घर में सब रोने लगे… लेकिन सिया ने हार नहीं मानी। उसने दिन-रात अपने पति की सेवा की, बिना खाए-पिए बस उसकी देखभाल करती रही।
कहते हैं सच्ची श्रद्धा और प्यार में बहुत ताकत होती है।
सिया की भक्ति