कुछ दिन काम भारी लगते हैं।
तुम कोशिश करते हो, असफल होते हो, फिर फिर कोशिश करते हो। यही प्रगति बनती है।
छोटे‑छोटे लगातार कदम एक बड़े छलाँग से ज्यादा मायने रखते हैं। आज एक छोटा काम कर लो।
कठोर मेहनत चुपचाप होती है। यह पर्दे के पीछे जमा होती रहती है, और एक दिन तुम पीछे मुड़कर देखोगे कि कितनी दूर आ गए हो।
लगातार आते रहो। काम करते रहो। तुम सोचते से ज़्यादा करीब हो।
एक और कोशिश। और ऐसे ही छोटे‑छोटे हौसले के लिए सब्सक्राइब करो।