Zvinyorwa zvakabatanidzwa
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बंदर, केला, बंदरिया प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मोह, वासना, किसी दूसरे के प्रति आकर्षण, बच्चों को जन्म देना इन विषयों पर जब आपको सुनते हैं न तो ऐसा लगता है कि जैसे आप वो हर चीज़ जो प्राकृतिक है उसका विरोध कर रहे हैं। मेरे शरीर में जो वासना उठी, आप उसका विरोध कर रहे हैं, ऐसा क्यों लगता है? आचार्य प्रशांत: मैं तुम्हारी जो प्राकृतिक वृत्तियाँ हैं उनका विरोध नहीं कर रहा हूँ, उनका एक तरीके से मैं सहयोग कर रहा हूँ, ताकि वो उस चीज़ को पा सकें जो वो खुद ही चाहती हैं। समझो थोड़ा, बताता हूँ। प्रकृति का विरोध क
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