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एक दिन… इंसान सो रहा था… और प्रकृति जाग रही थी… धीरे-धीरे हवा ने पेड़ों से कहा— “क्या तुमने महसूस किया… हम बदल रहे हैं?” पेड़ चुप थे… क्योंकि उनके पत्ते पहले ही गिर चुके थे… किसी तूफान से नहीं… बल्कि इंसानों की कुल्हाड़ी से… 🌍 पृथ्वी माँ सब देख रही थी… उसने आसमान से पूछा— “क्या मेरे बच्चे मुझे भूल गए हैं?” आसमान रो पड़ा… क्योंकि उसका नीला रंग अब धुएँ से ढक चुका था… नदियाँ भी आज चुप थीं… जो कभी गुनगुनाती थीं… आज उनमें बह रहा था— प्लास्टिक, गंदगी और दर्द… 🐦 एक छोटी चिड़िया अपने बच्चे से ब

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