आधी रात की तेज़ बारिश कराची की गलियों में बरस रही थी। जलती हुई गाड़ियों से आग की लपटें उठ रही थीं। एक खून से सना आदमी धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। उसका चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था। उसने अपनी नज़रें सीधी सामने टिकाईं और भारी आवाज़ में कहा—
“एक दुनिया में मैंने सिर्फ बदला लिया था… इस दुनिया में मैं पूरे निज़ाम को जला कर राख कर दूँगा!”
सब कुछ बदल चुका था।
सुबह की पहली सुनहरी किरणों के साथ, पठानकोट के उस पुराने घर में वह लड़का अपनी बहन के पास बैठा था। बहन कोमा में थी, मगर ज़िंदा थी। उसने उसका हाथ थ