एक छोटा सा गाँव था, जहाँ हर रात एक अजीब आवाज़ गूंजती थी। लोग डरते थे, पर कोई कारण नहीं जानता था। एक दिन मीरा ने हिम्मत की और उस आवाज़ का पीछा किया। वह आवाज़ उसे पुराने खंडहर तक ले गई, जहाँ एक घायल कुत्ता रो रहा था। मीरा ने उसकी मदद की। उस रात के बाद आवाज़ बंद हो गई। गाँव वालों को समझ आया—कभी-कभी डर के पी…
एक छोटा सा गाँव था, जहाँ हर रात एक अजीब आवाज़ गूंजती थी। लोग डरते थे, पर कोई कारण नहीं जानता था। एक दिन मीरा ने हिम्मत की और उस आवाज़ का पीछा किया। वह आवाज़ उसे पुराने खंडहर तक ले गई, जहाँ एक घायल कुत्ता रो रहा था। मीरा ने उसकी मदद की। उस रात के बाद आवाज़ बंद हो गई। गाँव वालों को समझ आया—कभी-कभी डर के पीछे मदद की पुकार छुपी होती है।