रात के 2 बजे मैं अपने कमरे में अकेला था और अचानक लाइट चली गई। मैंने अपने फोन की टॉर्च जलाई, तो दीवार पर मेरी परछाई के साथ एक और लंबी परछाई दिख रही थी। मुझे लगा शायद कोई कपड़ा लटका होगा, पर जैसे ही मैं हिला, मेरी परछाई तो हिली पर वो दूसरी परछाई वहीं खड़ी रही। डर के मारे मेरा गला सूख गया, मैंने धीरे से …
रात के 2 बजे मैं अपने कमरे में अकेला था और अचानक लाइट चली गई। मैंने अपने फोन की टॉर्च जलाई, तो दीवार पर मेरी परछाई के साथ एक और लंबी परछाई दिख रही थी। मुझे लगा शायद कोई कपड़ा लटका होगा, पर जैसे ही मैं हिला, मेरी परछाई तो हिली पर वो दूसरी परछाई वहीं खड़ी रही। डर के मारे मेरा गला सूख गया, मैंने धीरे से पीछे मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था। राहत की सांस लेते हुए मैंने फिर से दीवार पर टॉर्च मारी, तो इस बार वहां मेरी परछाई गायब थी और वो दूसरी परछाई अब मेरे गले को पकड़ने का नाटक कर रही थी। तभी मुझे अस