# धन्यवाद की अति
हमारी पीढ़ी अंग्रेज़ों और उनकी भाषा के प्रभाव में पली-बढ़ी। इसीलिए "पश्चिमी शिष्टाचार" का गहरा असर हम पर पड़ा।
हमें बताया जाता था — वे लोग कितने विनम्र हैं, हर बात पर "thank you" और "please" कहते हैं, कभी रूखे नहीं होते। एक घूँट पानी दो तो भी बड़ा "thank you" बोलते हैं।
धीरे-धीरे लगने लगा जैसे "thank you" कहना ही सभ्यता की सबसे बड़ी निशानी है।
लोग खुशी-खुशी कहने लगे —
*"आपको धन्यवाद दूँ या आप मुझे दें?"*
*"जितना धन्यवाद करूँ, कम है।"*
पर क्या किसी को एहसास नहीं होता कि जब क