[narrator] अपनी आँखें खोलिए! आप साल 1927 के महाड़ में खड़े हैं। धूल उड़ रही है, हज़ारों का हुजूम शोर मचा रहा है और आपके ठीक सामने डॉ. भीमराव अंबेडकर खड़े हैं। उनके हाथ में जलती हुई मशाल है। देखिए! वो मशाल एक किताब की तरफ बढ़ रही है और देखते ही देखते 'मनुस्मृति' धू-धू कर जलने लगती है।
लेकिन इस आग के पीछे का खौफनाक सच क्या है? चलिए, मैं आपको उस अंधेरी दुनिया के अंदर ले चलता हूँ जहाँ एक औरत होना किसी अभिशाप से कम नहीं है। आप मेरे साथ चलिए, हम उन घरों के अंदर झांकते हैं जहाँ ये कानून आज भी औरतों का दम घों