धुंध से ढकी उत्तराखंड की ऊँची पहाड़ियों में, मोहन अपने सीढ़ीनुमा खेतों में चुपचाप मेहनत करता था। वर्षों से वह परंपरागत खेती करता आया था—मंडुआ और सब्जियाँ, जो उसके परिवार का सहारा थीं। पर एक मौसम ऐसा आया जब रात के अंधेरे में जंगली सूअर खेतों में घुसने लगे। महीनों की मेहनत पलभर में रौंद दी जाती, और फसलें बर्बाद हो जातीं।
गाँव के लोग कहते—“अब खेती छोड़ दो, यह पहाड़ तुम्हें जीने नहीं देगा।” लेकिन मोहन ने हार नहीं मानी। उसने सूअरों की चाल समझी, काँटेदार झाड़ियाँ लगाईं, और साधारण सौर-दीप जलाकर रात का