कारगिल की बर्फ़ीली पहाड़ियों पर गोलियों की बारिश हो रही थी।
दुश्मन ऊँचाई पर बैठा था और भारतीय सैनिकों पर लगातार हमला कर रहा था।
उसी समय एक बहादुर भारतीय सैनिक आगे बढ़ा।
लड़ते-लड़ते उसके शरीर में एक नहीं… दो नहीं… बल्कि सत्रह गोलियाँ लग गईं।
लेकिन हैरानी की बात यह थी कि
इतनी गोलियाँ लगने के बाद भी उसने हार नहीं मानी।
वह घायल हालत में भी अपने साथियों को रास्ता दिखाता रहा
और दुश्मनों से लड़ता रहा।
आखिरकार उसकी बहादुरी की वजह से
भारतीय सेना ने उस पहाड़ी पर तिरंगा लहरा दिया।
ऐसे वीर सैनिकों की वजह से