करीब तीन साल पहले मैं अठाइस साल की ही थी जब मेरे शौहर की सड़क हादसे में मौत हो गयी। तब हम दिल्ली में रहते थे। उसके दो-तीन महीने बाद दिल्ली का मकान किराये पे दे कर मैं मेरठ से थोड़ी दूर अपने पेरन्ट्स के साथ आकर रहने लगी। मैं अच्छे खानदान से हूँ और पैसे की कोई कमी नहीं है। मेरे वालिद की शुगर-मिल है और वो मुक़ामी पॉलिटिशन भी हैं। मैं शुरू से ही ऐशो-आराम में पली बड़ी हुई हूँ... बोर्डिंग स्कूल में पढ़ी और फिर दिल्ली के नामी कॉलेज से बी-ए और फिर बी-एड किया था। आज़ाद ख्यालात की की होने के बावजूद मैं काफी अच्