अब आरव ने एक नया काम शुरू किया।
स्कूल के बाद वह रोज उस पुराने कुएँ के पास जाता।
पहले दिन उसने सिर्फ कचरा साफ किया।
लोग हंसने लगे— “अरे, ये बच्चा कुआँ ठीक करेगा!”
दूसरे दिन उसने मिट्टी हटाई।
तीसरे दिन पत्थर निकाले।
धीरे-धीरे वह रोज थोड़ा-थोड़ा काम करता रहा।
एक दिन उसका दोस्त रोहित आया और बोला, “तू ये सब क्यों कर रहा है? इससे क्या मिलेगा?”
आरव बोला, “अगर पानी आ गया, तो सबका फायदा होगा।”
कुछ दिनों बाद गाँव के दो छोटे बच्चे भी उसकी मदद करने लगे।
फिर एक बुजुर्ग आदमी भी आ गया।
धीरे-धीरे लोग जुड़ने लगे