कमरा नंबर 27”
बारिश से भीगी एक सुनसान रात…
एक थका हुआ लड़का, आदित्य, सड़क पर चलते-चलते एक पुराने लॉज के सामने रुकता है।
उसे सिर्फ एक रात गुजारनी होती है… लेकिन उसे नहीं पता होता कि ये रात उसकी आखिरी होगी।
लॉज के अंदर अजीब सन्नाटा था… जैसे वहां समय रुक गया हो।
पुरानी दीवारें, हल्की पीली रोशनी… और हवा में एक अजीब सी बेचैनी।
उसे कमरा नंबर 27 दिया जाता है…
गलियारे के सबसे आखिरी छोर पर… जहां रोशनी भी पूरी तरह नहीं पहुंचती।
कमरा खोलते ही उसे एक अजीब सी बदबू महसूस होती है…