जब इस दुनिया में इंसानों का नामोनिशान तक नहीं था। हर तरफ सिर्फ खामोशी थी। ना कोई जानवर ना कोई जिंदगी का निशान। उस वक्त एक दिन अल्लाह रब्बुल आलमीन ने अपने [संगीत] तमाम फरिश्तों को हुक्म दिया। ऐ मेरे फरिश्तों मेरे अर्श अजीम के करीब सब इकट्ठा हो जाओ। अल्लाह रब्बुल आलमीन का हुक्म मिलते ही बेहिसाब फरिश्ते रोशनी की त…
जब इस दुनिया में इंसानों का नामोनिशान तक नहीं था। हर तरफ सिर्फ खामोशी थी। ना कोई जानवर ना कोई जिंदगी का निशान। उस वक्त एक दिन अल्लाह रब्बुल आलमीन ने अपने [संगीत] तमाम फरिश्तों को हुक्म दिया। ऐ मेरे फरिश्तों मेरे अर्श अजीम के करीब सब इकट्ठा हो जाओ। अल्लाह रब्बुल आलमीन का हुक्म मिलते ही बेहिसाब फरिश्ते रोशनी की तरह चमकते हुए उस जगह हाजिर हो गए। तब अल्लाह ताला ने फरमाया मैं जमीन पर अपना एक नुमाइंदा भेजना चाहता हूं। यह सुनकर फरिश्ते हैरान हो गए। उनकी पेशानियों पर सवाल थे और दिलों में तज्जुब।
Diese Audiodatei ist abgelaufen.
Geteilte Audio-Links laufen nach 24 Stunden ab. Sie können Ihre eigenen unten generieren!
Erstellen Sie Ihr eigenes AI Audio
Erzeugen Sie professionelle Voiceovers mit 20+ KI-Modellen – völlig kostenlos, keine Anmeldung erforderlich.