क्या आपने कभी यह अनुभव किया है…
कि सब कुछ पाने के बाद भी
मन कहीं खाली-सा रहता है?
ज्ञान हो…
सम्मान हो…
उपलब्धियाँ हो…
फिर भी हृदय पूछता है —
“बस यही था?”
आज की यह कथा है
एक ऐसे महापुरुष की,
जिन्होंने वेदों को रचा…
इतिहास लिख दिया…
फिर भी स्वयं को अपूर्ण पाया।
यह कथा है —
वेद व्यास
और उनके गुरु —
नारद मुनि
के दिव्य संवाद की।
व्यास जी…
जिन्होंने चार वेदों का विभाजन किया,
उपनिषदों को संकलित किया,
महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना की।
इतिहास, धर्म, नीति —
सब कुछ उन्होंने लिख दिया।
फिर भी…
नैमीशार