राहुल हर समय अपने फोन में ही खोया रहता था…”
“रील्स, गेम, चैट… बस वही उसकी दुनिया थी।”
“एक दिन उसकी छोटी बहन ने कहा…”
“भैया, चलो बाहर खेलते है..
राहुल बिना देखे हाथ से मना करता है
“नहीं…”
“अचानक लाइट चली गई…”
“फोन बंद, इंटरनेट खत्म…”
“मजबूरी में राहुल बाहर गया.
“और पहली बार असली जिंदगी का मजा लिया…”
“दोस्तों के साथ खेला, हवा का मज़ा लिया…”
“शाम को जब लाइट आई…”
“राहुल ने फोन उठाया…”
“फिर मुस्कुराकर रख दिया…”
“उसे समझ आ गया था—असली दुनिया स्क्रीन के अंदर नहीं, बाहर है।”