श्रीमद्भगवद गीता अध्याय 2 श्लोक 22:
मृत्यु का उत्सव और आत्मा का नया परिधान: मनोवैज्ञानिक और समकालीन विश्लेषण, अविनाशी आत्मा और नश्वर शरीर के परिवर्तनकारी सिद्धांत का एक अद्भुत क्रांतिकारी और वैज्ञानिक शोधपरक व्याख्या
© प्रोफेसर (डॉ.) कृष्ण बीर सिंह चौहान, खेड़ी-काँटी
भूमिका (Abstract)
श्रीमद्भगवद गीता का अध्याय 2, श्लोक 22, जिसे अक्सर 'परिवर्तन का श्लोक' कहा जाता है, मानवीय अस्तित्व की नश्वरता और आत्मा की निरंतरता के बीच का सबसे सुंदर सेतु है। भगवान श्री कृष्ण अर्जुन के विषाद को दूर करने के