डोंगरी… 60 और 70 के दशक का वह इलाका… जहाँ तंग गलियों में गरीबी रहती थी… और उन्हीं गलियों के साए में पनपती थी अंडरवर्ल्ड की ताकत। हाजी मस्तान… करीम लाला… वरदराजन मुदलियार—ये सिर्फ नाम नहीं थे… ये उस वक्त की असली सत्ता थे। अदालतों में नहीं… गलियों में फैसले होते थे। और एक छोटा सा लड़का… यह सब देख रहा था। दाऊद। उसे किताबों में दिलचस्पी नहीं थी… उसे ताकत चाहिए थी। वह उन लोगों को देखता था… जिनके इशारे पर बाज़ार रुक जाता था… जिनके सामने पुलिस भी नज़रें झुका लेती थी। उसे पैसे नहीं… कंट्रोल चाहिए था। और