वर्दान शहर कभी सोता नहीं था—लेकिन आज रात, जैसे उसने अपनी सांस रोक रखी थी।
अर्जुन मलिक एक जर्जर छत के किनारे झुका हुआ था, नीचे बारह मंज़िलों की ऊँचाई पर फैली नीयन लाइट्स से चमकती सड़कों का जाल दिखाई दे रहा था। बारिश की बूंदें उसके जूतों के नीचे कंक्रीट को फिसलन भरा बना रही थीं। उसके ईयरपीस में हल्की-सी खरखराहट गूंज रही थी।
“टारगेट मूव कर रहा है,” रिया की आवाज आई। शांत, लेकिन तनाव से भरी। “तुम्हारे पास दो मिनट हैं, उससे पहले कि काफिला टनल तक पहुंचे।”
अर्जुन ने अपनी राइफल की स्ट्रैप ठीक की।
“कॉपी।”