“एक लड़का… जिसके घर में कभी टीवी नहीं था…
जिसने पहली बार फोन देखा… तो उसे सिर्फ इस्तेमाल नहीं किया… समझा…
और वही लड़का… एक दिन दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी का चेहरा बन गया…
ये कहानी है सपनों की… संघर्ष की… और उस सादगी की…
जो कभी शोर नहीं मचाती… लेकिन इतिहास लिख देती है…”
“1972… चेन्नई का एक साधारण सा घर…
जहाँ न AC था… न luxury…
लेकिन था एक सपना… जो अभी शब्दों में भी नहीं ढला था…”
“पिता – एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर…
माँ – एक स्टेनोग्राफर…
और छोटा सा परिवार… जो हर छोटी चीज़ को संभाल कर जीता था…”