एक ऐसे सहाबा जो बहुत ही मजाकिया किस्म के थे जिनका नाम हजरत नोमान बिन अम्र था जो हुजूर से बड़ी मोहब्बत करते थे। मंडी में जो भी नया फल आता तो हजरत नोमान उसे उधार खरीद कर लाते और हुजूर की खिदमत में हदिया पेश करते। फिर हुजूर उनकी भलाई की दुआएं करते और शुक्रिया अदा करते कि तुमने मुझे नया और ताजा फल खिलाया। लेकिन फिर उसकी कीमत हुजूर को ही अदा करना पड़ता। क्योंकि जब दुकानदार अपने पैसे मांगने आता तो हजरत नोमान कहते कि वह फल तो हुजूर ने खाया। मैंने थोड़ी खाया। जिन्होंने खाया उनसे जाके पैसे लो। फिर वो दुक