साल था 1953। शीत युद्ध अपने चरम पर था। अमेरिका और सोवियत संघ एक भयावह हथियारों की दौड़ में बंद थे — न सिर्फ बम और मिसाइलों के लिए, बल्कि किसी और चीज़ के लिए जो कहीं ज़्यादा खतरनाक थी: इंसानी दिमाग पर नियंत्रण।
अमेरिकी खुफिया अधिकारियों को यकीन था कि सोवियत संघ ने युद्धबंदियों को ब्रेनवॉश करने की तकनीक विकसित कर ली है। उन्होंने इसे होते देखा था — कोरिया में पकड़े गए अमेरिकी सैनिक पूरी तरह बदले हुए विचारों के साथ वापस आ रहे थे, साम्यवाद की तारीफ कर रहे थे, अपने देश को कोस रहे थे।
CIA डरी हुई थी।