एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक मजदूर रहता था।
उसका घर बहुत छोटा था — मिट्टी की दीवारें, टीन की छत और सामने एक छोटा सा आँगन।
बरसात के मौसम में छत से पानी टपकता था।
गर्मी में घर इतना गर्म हो जाता था कि अंदर बैठना मुश्किल हो जाता था।
लेकिन उस छोटे से घर में एक बहुत बड़ा सपना रहता था।
रामू का बेटा — अरुण।
रामू हर दिन सुबह अंधेरा रहते उठ जाता था।
उसकी पत्नी जल्दी से चूल्हे पर रोटी बनाती और नमक के साथ उसे दे देती।
रामू वही रोटी खाकर काम पर निकल जाता।
दिन भर वह ईंट ढोता, सीमेंट उठाता और धूप में पसी