“महाराज जी, भगवान हमें दिखाई क्यों नहीं देते? हम रोज़ प्रार्थना करते हैं, नाम लेते हैं, फिर भी हमें उनका दर्शन क्यों नहीं होता?”
महाराज जी मुस्कुराए और बोले —
बेटा, भगवान को देखने के लिए आँखों से ज़्यादा दिल की ज़रूरत होती है।
हमारी आँखें संसार को देखने की आदी हो गई हैं, लेकिन भगवान को देखने के लिए मन को शांत और निर्मल बनाना पड़ता है।
सोचो, जब पानी बहुत हिल रहा होता है तो उसमें अपना चेहरा भी साफ़ नहीं दिखाई देता। लेकिन वही पानी जब बिल्कुल शांत हो जाता है तो उसमें आकाश और चाँद भी साफ दिखाई देन