गहरी छलांग लगाने के बाद राघव को लगा जैसे वह अनंत काल के लिए शून्य में गिर रहा है, लेकिन कुछ ही क्षणों में वह एक ठंडे और चिपचिपे पानी की सतह से जा टकराया। कुएँ का पानी इतना ठंडा था कि राघव का शरीर सुन्न पड़ गया। टॉर्च उसके हाथ से छूटकर पानी की गहराई में कहीं खो गई थी। चारों ओर सिर्फ घुप्प अंधेरा था और ऊपर से आता हुआ धुंधला सा चाँद का प्रकाश, जिससे कुएँ की दीवारें साफ़ दिखाई नहीं दे रही थीं।
राघव ने कांपते हाथों से पानी में हाथ-पैर मारना शुरू किया। तभी उसका हाथ पत्थर की एक ऊबड़-खाबड़ दीवार से टकरा