एक ठंडे रेगिस्तान में एक दादी अकेली रहती थीं। वहाँ पास में एक शरारती लेकिन मददगार बंदर भी रहता था। एक दिन दादी ने कहा, “क्यों न हम मिलकर बर्फ का घर बनाएं?” बंदर खुशी से मान गया। वह दूर-दूर पहाड़ों से बर्फ लाकर देता और दादी उसे जोड़कर दीवार बनातीं। ठंडी हवाएँ चलतीं, लेकिन दोनों हिम्मत नहीं हारते। कई दिनों की मेहनत के बाद सुंदर बर्फ का घर तैयार हो गया। अब दादी को ठंड से बचाव मिल गया। बंदर और दादी की दोस्ती और मजबूत हो गई, और वे खुशी-खुशी साथ रहने लगे।